चतुर्दिक

विषय पर केंद्रित होने पर स्वयं विषय का स्वरूप बदल जाता है (द्वंद्वात्मक भौतिकवाद में मनन का स्थान ) ; विकल्प का निर्विकल्प में विश्रांति ही तत्व है ; इस प्रकार उत्तरोत्तर विश्रांति के द्वारा अपना स्वरूप स्फुट होता है - यह शेष है ।

मंगलवार, 31 मार्च 2015

आलोचना के कब्रिस्तान से...

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अरुण माहेश्वरी सन् 1984 की बात है। आचार्य रामचंद्र शुक्ल का जन्म शताब्दी वर्ष था। कहा जा सकता है - आज की हिन्दी आलोचना क...
सोमवार, 30 मार्च 2015

एक नीच ट्रेजेडी

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अरुण माहेश्वरी सचमुच आम आदमी पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक मे जो हुआ वह एक ऐसी नीच ट्रेजेडी का दृश्य है जिसके अंत में सिवाय ...
गुरुवार, 26 मार्च 2015

सरला माहेश्वरी की कविताएं

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धारा 66 ए के अंत की रात में लिखी गई  कविता - मन की बात : मन की बात कितना आसान है तुम्हारे लिये कहना अपने मन की बात करना अप...

ब्राह्मणवाद

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अरुण माहेश्वरी अर्चना वर्मा जी ने अपनी वाल पर ब्राह्मणवाद शीर्षक से सात पोस्ट लगाई है। इसमें उन्होंने बड़ी सरलता से ब्राह्मणवाद के प्...
सोमवार, 23 मार्च 2015

ली क्वान यू

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अरुण माहेश्वरी ली क्वान यू, सिंगापुर के किंवदंती नेता, पूरब का बुद्धिमान व्यक्ति, सन् 1959 में अंग्रेजो से सिंगापुर की मुक्ति के बाद ...

उदय प्रकाश को पीटने की धमकी : फासीवाद की पद-ध्वनि

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सभी मित्रों का ध्यान एक बेहद चिंताजनक तथ्य की ओर दिलाना चाहता हूँ । पंकज कुमार झा नामक एक महोदय ने फ़ेसबुक में उदय प्रकाश की वाल पर प...
रविवार, 22 मार्च 2015

अमर शहीद भगतसिंह : हवा में जिसके विचारों की खुशबू आज भी है, वो रहे, रहे न रहे

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- सरला माहेश्वरी (23 मार्च 1931 के दिन भगत सिंह को फांसी दी गयी थी। उस दिन को याद करते हुए उनकी स्मृति में श्रद्धार्थ सरला माहेश्वरी का ...
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