चतुर्दिक

विषय पर केंद्रित होने पर स्वयं विषय का स्वरूप बदल जाता है (द्वंद्वात्मक भौतिकवाद में मनन का स्थान ) ; विकल्प का निर्विकल्प में विश्रांति ही तत्व है ; इस प्रकार उत्तरोत्तर विश्रांति के द्वारा अपना स्वरूप स्फुट होता है - यह शेष है ।

शनिवार, 7 फ़रवरी 2026

दक्षिणपंथ, तानाशाही और पेडोफाइल

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  -अरुण माहेश्वरी  देखते-देखते, दक्षिणपंथ से तानाशाही की ओर बढ़ रहे विश्व में हम यौन कुंठाओं से भरे, बच्चों    तक के यौन शोषण के राक्षसी कृत...
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सोमवार, 19 जनवरी 2026

“Board of Peace” : शेखचिल्ली का महल, जिसकी इतिहास में कोई ज़मीन नहीं है

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- अरुण माहेश्वरी   जिस गति से चीन का उभार हो रहा है और ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका जिस तेज़ी से अपनी अंतरराष्ट्रीय भूमिकाओं से पैर खींच ...
बुधवार, 14 जनवरी 2026

ट्रंप की सनक या अमेरिकी साम्राज्यवाद का असल रूप !

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  -अरुण माहेश्वरी ट्रंप ने आज सारी दुनिया को जैसे किसी हुक पर टांग कर रख दिया है । सामान्य बुद्धि का कोई भी आदमी, जो खास तौर पर द्वितीय विश्...
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सोमवार, 22 दिसंबर 2025

संघ के अवलोपीकरण की भागवत की उलटबांसी !

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−अरुण माहेश्वरी  दो दिन पहले कोलकाता में आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत ने संघ क्या है और क्या नहीं है, इस पर रोशनी डालते हुए अनायास ही अपने...
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सोमवार, 15 दिसंबर 2025

कम्प्यूटर क्रांति महज युवाओं का मसला नहीं है

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-अरुण माहेश्वरी    जगदीश्वर चतुर्वेदी जी की ‘ कंप्यूटर क्रांति और युवा ‘ विषय पर वार्ता से ऐसा आभास हो रहा था कि जैसे यह कोई महज एक नैतिक...
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Arun Maheshwari
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