चतुर्दिक

विषय पर केंद्रित होने पर स्वयं विषय का स्वरूप बदल जाता है (द्वंद्वात्मक भौतिकवाद में मनन का स्थान ) ; विकल्प का निर्विकल्प में विश्रांति ही तत्व है ; इस प्रकार उत्तरोत्तर विश्रांति के द्वारा अपना स्वरूप स्फुट होता है - यह शेष है ।

मंगलवार, 1 सितंबर 2026

जब पुरानी राजनीति असंभव हो जाती है

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  (बंगाल में सीपीआई(एम) के बोधोदय पर क्षण भर) —अरुण माहेश्वरी यह एक मान्य तथ्य है कि पश्चिम बंगाल की विशेष परिस्थितियों में सीपीआई(एम) पिछले...
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शुक्रवार, 28 अगस्त 2026

मोदी की व्यापारी बुद्धि और राहुल की राजनीतिक दृष्टि

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- अरुण माहेश्वरी  हम सब जानते हैं कि व्यापारी बुद्धि और राजनीतिक बुद्धि का मूलभूत अंतर उनके लक्ष्य की प्रकृति में है। व्यापारी बुद्धि का लक्...

मूल मसला चुनावी कार्यनीति का नहीं, राजनीति का होना चाहिए

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(  सीपीआई(एम) की पश्चिम बंगाल की विस्तारित राज्य कमेटी की कल्याणी  बैठक के संदर्भ में एक प्रतिवेदन) —अरुण माहेश्वरी पश्चिम बंगाल में सीपीआई(...
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रविवार, 23 अगस्त 2026

सत्ता की सीमित बुद्धि बनाम प्रतिरोध की अनंत संभावनाएँ

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  (राहुल गांधी के आत्मविश्वास की राजनीतिक रणनीति का दार्शनिक आधार) – अरुण माहेश्वरी टाइम्स ऑफ इंडिया ने 20 अगस्त को राहुल गांधी के एक स्पष्ट...
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शुक्रवार, 14 अगस्त 2026

छप्पन इंच का छोटा बंदर!

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( सीमित बुद्धि की राजनीति और बारिश में डूब गये मानसून सत्र का सबक) —अरुण माहेश्वरी ऐलेन बाद्यू की यह एक बेहद महत्वपूर्ण स्थापना है कि सत्य क...
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मंगलवार, 11 अगस्त 2026

अमेरिका में Gen Z

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-अरुण माहेश्वरी   आज (11 अगस्त 2026) के टेलिग्राफ में ‘न्यूयार्क टाइम्स न्यूज सर्विस ’ की एक रिपोर्ट है – ‘ Beyond Class : And then ther...
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