चतुर्दिक

विषय पर केंद्रित होने पर स्वयं विषय का स्वरूप बदल जाता है (द्वंद्वात्मक भौतिकवाद में मनन का स्थान ) ; विकल्प का निर्विकल्प में विश्रांति ही तत्व है ; इस प्रकार उत्तरोत्तर विश्रांति के द्वारा अपना स्वरूप स्फुट होता है - यह शेष है ।

बुधवार, 29 अप्रैल 2015

व्यापकतम प्रतिरोध संघर्ष में ही वामपंथ की संभावनाएं है

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अरुण माहेश्वरी ‘व्यक्ति नहीं, नीतियां प्रमुख होती है’- राजनीति के क्षेत्र में इस तरह की आदर्श, आप्त बातों के खोखलेपन के इतिहास-बोध के ...

'जानकीदास तेजपाल मैनशन'

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- अरुण माहेश्वरी रोहिणी अग्रवाल जी ने अलका सरावगी के हाल में प्रकाशित उपन्यास ‘जानकीदास तेजपाल मैनशन’ की अतिशय तारीफ करते हुए अपनी फेस...
शुक्रवार, 17 अप्रैल 2015

सीपीआई(एम) की 21वीं कांग्रेस : किससे आंख चुराने की कोशिश !

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अरुण माहेश्वरी सीपीआई(एम) की 21वीं कांग्रेस को शुरू हुए तीन दिन बीत चुके हैं। इस कांग्रेस में अभी किन बातों पर क्या बहस चल रहीं है, इ...
बुधवार, 15 अप्रैल 2015

राष्ट्र के हित में इंटरनेट सेवाओं का पूर्ण राष्ट्रीयकरण जरूरी है : प्रसंग नेट- तटस्थता

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अरुण माहेश्वरी तथाकथित कारपोरेट जनतंत्र के ध्वजाधारी अमेरिका में अभी तक जिस ओर लोगों का ध्यान उतनी संजीदगी से नहीं गया है, उस सवाल ने...
मंगलवार, 14 अप्रैल 2015

अग्निबीज डिरोजियो

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सरला माहेश्वरी (‘‘बुद्धिमानों की मंत्रणा ने नहीं बल्कि विक्षिप्त लोगों के ‘पागलपन‘ ने मनुष्य के चिंतन और कर्म में, उसके अंदर औ...
सोमवार, 13 अप्रैल 2015

इडवर्डो ग्यालियानो नहीं रहे

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उरुग्वे के अपने जन्म स्थान मोन्तेविदेओ में कल, 13 अप्रैल को लातिन अमेरिका के लोकप्रिय वामपंथी लेखक, गैर-पेशेवर इतिहासकार, राजनीति, अ...

क्या यह लातिन अमेरिका के इतिहास के एक नये अध्याय का प्रारंभ है ?

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17 दिसंबर 2014, जब 55 साल बाद पहली बार क्यूबा और अमेरिका के राष्ट्रपतियों के बीच टेलिफोन पर वार्ता हुई और दोनों देशों में कूटनीतिक संबंधों...
मंगलवार, 31 मार्च 2015

आलोचना के कब्रिस्तान से...

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अरुण माहेश्वरी सन् 1984 की बात है। आचार्य रामचंद्र शुक्ल का जन्म शताब्दी वर्ष था। कहा जा सकता है - आज की हिन्दी आलोचना क...
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Arun Maheshwari
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