चतुर्दिक

विषय पर केंद्रित होने पर स्वयं विषय का स्वरूप बदल जाता है (द्वंद्वात्मक भौतिकवाद में मनन का स्थान ) ; विकल्प का निर्विकल्प में विश्रांति ही तत्व है ; इस प्रकार उत्तरोत्तर विश्रांति के द्वारा अपना स्वरूप स्फुट होता है - यह शेष है ।

शनिवार, 30 अप्रैल 2016

गुलजार और रवीन्द्रनाथ की कविताओं का अनुवाद

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अरुण माहेश्वरी गुलजार मूलत: हिंदी फिल्म जगत की एक उपज है, अर्थात, कहा जा सकता है, शुद्ध व्यवसायिक जगत की उपज। बौलीवुड के ...
मंगलवार, 12 अप्रैल 2016

वामपंथी कांग्रेस = जनतांत्रिक वामपंथ !

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अरुण माहेश्वरी ‘‘दर्शनशास्त्र विश्व के चिंतन के रूप में तब तक सामने नहीं आता है जब तक यथार्थ अपने बनने की प्रक्रिया को पूरा नहीं कर ले...
शुक्रवार, 8 अप्रैल 2016

इंद्रनाथ बंदोपाध्याय नहीं रहे

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इंद्रनाथ बंदोपाध्याय नहीं रहे। 21 मार्च 2016 की बात है। तब हम इलाहाबाद और दिल्ली की यात्रा पर थे। खबर मिलने का कोई जरिया नहीं था। दो दि...
शनिवार, 26 मार्च 2016

आधुनिकता, लोकतंत्र और राष्ट्र का निर्माण : एक वामपंथी परिप्रेक्ष्य

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अरुण माहेश्वरी ने यह लेख इसी 18 मार्च को इलाहाबाद में सुप्रसिद्ध कथाकार, उपन्यासकार और संपादक मार्कण्डेय की पुण्य तिथि पर उनकी स्मृति ...
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Arun Maheshwari
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