चतुर्दिक

विषय पर केंद्रित होने पर स्वयं विषय का स्वरूप बदल जाता है (द्वंद्वात्मक भौतिकवाद में मनन का स्थान ) ; विकल्प का निर्विकल्प में विश्रांति ही तत्व है ; इस प्रकार उत्तरोत्तर विश्रांति के द्वारा अपना स्वरूप स्फुट होता है - यह शेष है ।

शनिवार, 22 अप्रैल 2017

मार्क्सवाद-लेनिनवाद के विज्ञान पर एक सोच

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(लेनिन के 147 वें जन्मदिन पर खास) -अरुण माहेश्वरी आज रूस की नवंबर क्रांति के महान रूपाकार लेनिन का 147 वां जन्मदिन है। यही साल मानव स...
गुरुवार, 20 अप्रैल 2017

मार्गदर्शकों के लिये जीवन के परम सत्य की उपलब्धि का अर्थात निर्वाण का क्षण

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‘कानून अपना काम करेगा’ - यह कथन है के कानून मंत्री कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद का। उनसे जब पूछा गया कि क्या भाजपा के मार्गदर्शक आडवाणी-ज...
बुधवार, 19 अप्रैल 2017

खुल्लम-खुल्ला !

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सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उमा भारती ने सबके सामने अपनी जिस प्रकार की अति - प्रसन्न और आह्लादित तस्वीर पेश की...
सोमवार, 17 अप्रैल 2017

पर्रीकर साहब को घबड़ाहट क्यों होती है !

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-अरुण माहेश्वरी सचमुच यह देख कर भारी हैरानी होती है कि कितनी आसानी से पूर्व प्रतिरक्षा मंत्री, अभी गोवा के मुख्यमंत्री, मनोहर पार्रीक...
शनिवार, 15 अप्रैल 2017

तालिबानी राजनीति के प्रतिरोध की समस्याएं

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-अरुण माहेश्वरी “नाजीवाद एक ऐसी परिघटना है जिसकी कोई तार्किक व्याख्या मुमकिन नहीं है। ...आश्विच के सामने इतिहासकार की व्याख्या की ताक...
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Arun Maheshwari
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