चतुर्दिक

विषय पर केंद्रित होने पर स्वयं विषय का स्वरूप बदल जाता है (द्वंद्वात्मक भौतिकवाद में मनन का स्थान ) ; विकल्प का निर्विकल्प में विश्रांति ही तत्व है ; इस प्रकार उत्तरोत्तर विश्रांति के द्वारा अपना स्वरूप स्फुट होता है - यह शेष है ।

शुक्रवार, 27 अक्टूबर 2017

छठ उत्सव और सौंदर्याभिरुचियों के प्रश्न

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-अरुण माहेश्वरी छठ उत्सव और उसमें स्त्रियों के ललाट से नाक के अंत तक गाढ़े सिंदूर की लकीर, नदी में घुटनों तक पानी में खड़ी स्त्रि...
शुक्रवार, 20 अक्टूबर 2017

'शूद्र' और 'कलर आफ डार्कनेस'

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—अरुण माहेश्वरी दिवाली के सिर्फ एक दिन पहले, 17 अक्तूबर को एनडीटीवी के प्राइम टाइम पर रवीश कुमार की गिरीश मकवाना से वार्ता और उनकी फि...
शनिवार, 14 अक्टूबर 2017

क्या प्रधानमंत्री पद से मोदी की विदाई 2019 के पहले ही नहीं हो जायेगी ?

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- अरुण माहेश्वरी पटना विश्वविद्यालय के शताब्दी समारोह में मोदी अपने चिर - परिचित , हाँकते जाने के अंदाज में बोल रहे...
सोमवार, 9 अक्टूबर 2017

मोदी राहुल का रास्ता साफ करने के लिये ही आए हैं

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- अरुण माहेश्वरी आज ‘ द वायर ’ वेबसाइट पर ‘ वाइड एंगल ’ कार्यक्रम में   एक वार्ता सुन रहा था चुनाव जीतने की भाजपा ...
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Arun Maheshwari
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