चतुर्दिक

विषय पर केंद्रित होने पर स्वयं विषय का स्वरूप बदल जाता है (द्वंद्वात्मक भौतिकवाद में मनन का स्थान ) ; विकल्प का निर्विकल्प में विश्रांति ही तत्व है ; इस प्रकार उत्तरोत्तर विश्रांति के द्वारा अपना स्वरूप स्फुट होता है - यह शेष है ।

शुक्रवार, 24 नवंबर 2017

मुक्तिबोध आज हमारे समय के सबसे जिंदा रचनाकार है

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-अरुण माहेेश्वरी मुक्तिबोध शताब्दी वर्ष की तमाम गतिविधियों से इतना तो साफ है कि मुक्तिबोध आज भी हिंदी साहित्य की एक समस्या बने...
गुरुवार, 23 नवंबर 2017

'राजमाता' पद्मावती के वंशधरों का अभी गौरव गान हो रहा है या निंदा गान !

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—अरुण माहेश्वरी 'पद्मावती' प्रकरण पर भाजपा और उसकी करणी सेना जो कर रही है, इन लोगों से इसके अतिरिक्त किसी और बात की उम्मीद भी...
मंगलवार, 21 नवंबर 2017

मोदी की चिंता — अभी सिर्फ गुजरात चाहिए, संसद जाए भाड़ में !

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—अरुण माहेश्वरी सन् 2014 में पूर्ण बहुमत के साथ मोदी जब लोक सभा में जीत कर आए थे, कौन सोच सकता था कि तीन साल बाद ही यह लोक सभा उन्हें ड...
रविवार, 19 नवंबर 2017

यह कैसा गुलामी से मुक्ति का 'फंदा'

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-अरुण माहेश्वरी कल ही ‘लहक’ पत्रिका का नया अंक (अक्तूबर-नवंबर 2017) मिला है । इसमें एक अनोखी टिप्पणी है विजय बहादुर सिंह की । उमाशंकर...
शुक्रवार, 17 नवंबर 2017

'मूडीज' को लेकर अरुण जेटली किसे बुद्धू बना रहे हैं !

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—अरुण माहेश्वरी भारत के बारे में 'मूडीज' की क्रेडिट रेटिंग में मामूली बढ़ोतरी का क्या असली मतलब है ? किसी भी सार्वभौम देश के ब...

'पद्मावती' प्रकरण एक सांप्रदायिक फासीवादी राजनीति की चाल के अलावा कुछ नहीं है

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—अरुण माहेश्वरी जो राजस्थान आज भारत में अनुसूचित जनजातियों पर अत्याचार के मामले में पहले स्थान पर है और अनुसूचित जातियों पर जुल्मों ...
सोमवार, 13 नवंबर 2017

जीएसटी : एक समग्र मूल्यांकन

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-अरुण माहेश्वरी जी एस टी की पृष्ठभूमि मोदी जी और आरएसएस के सारे ट्रौल-अट्रौल देश-विदेश में घूम-घूम कर पूर्व के साठ सालों के कां...
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Arun Maheshwari
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