चतुर्दिक

विषय पर केंद्रित होने पर स्वयं विषय का स्वरूप बदल जाता है (द्वंद्वात्मक भौतिकवाद में मनन का स्थान ) ; विकल्प का निर्विकल्प में विश्रांति ही तत्व है ; इस प्रकार उत्तरोत्तर विश्रांति के द्वारा अपना स्वरूप स्फुट होता है - यह शेष है ।

शनिवार, 30 दिसंबर 2017

अलविदा ! प्रतिकूलताओं से नई ऊर्जा लेता हुआ साल 2017

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—अरुण माहेश्वरी  इतिहास काल खंडों के चौखटे में ही रूप ग्रहण करता है । अन्यथा वह महज एक प्रवाह, नितांत सामयिक और परिस्थितियों का एक क्ष...
गुरुवार, 28 दिसंबर 2017

रघुराम राजन : एक बैंकर

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(अर्थात, 'ठगी और पैगंबरी के मिश्रण से निर्मित एक निष्ठुर चरित्र') —अरुण माहेश्वरी रघुराम जी. राजन भारत में अभी मोदी-विरोधी ब...
बुधवार, 27 दिसंबर 2017

आध्यात्मिक आश्रमों में सेक्स रैकेट !

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- अरुण माहेश्वरी   आध्यात्म के नाम पर मूलत : देह - व्यापार में लगा ढोंगी बाबा वीरेंद्र दीक्षित का आध्यात्मिक विश्वविद...
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Arun Maheshwari
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