चतुर्दिक

विषय पर केंद्रित होने पर स्वयं विषय का स्वरूप बदल जाता है (द्वंद्वात्मक भौतिकवाद में मनन का स्थान ) ; विकल्प का निर्विकल्प में विश्रांति ही तत्व है ; इस प्रकार उत्तरोत्तर विश्रांति के द्वारा अपना स्वरूप स्फुट होता है - यह शेष है ।

रविवार, 18 फ़रवरी 2018

उत्तर-सत्य और लोकतंत्र

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—अरुण माहेश्वरी हम सचमुच एक अजीब से काल में रह रहे है । अंबर्तो इको का प्रसिद्ध लेख है — Power of Falsehood । इस लेख की मैंने पहले भी क...
1 टिप्पणी:
मंगलवार, 13 फ़रवरी 2018

भूमिका

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भारत में मोदी – आरएसएस के फासीवाद के खिलाफ व्यापकतम संयुक्त मोर्चा की दिशा में धर्म – निरपेक्ष और जनतांत्रिक ताकत...
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Arun Maheshwari
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