चतुर्दिक

विषय पर केंद्रित होने पर स्वयं विषय का स्वरूप बदल जाता है (द्वंद्वात्मक भौतिकवाद में मनन का स्थान ) ; विकल्प का निर्विकल्प में विश्रांति ही तत्व है ; इस प्रकार उत्तरोत्तर विश्रांति के द्वारा अपना स्वरूप स्फुट होता है - यह शेष है ।

गुरुवार, 22 फ़रवरी 2018

हिटलरशाही पूंजीवादी पार्टी से भ्रष्टाचार रोकने की उम्मीद करना कोरी नादानी है

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—अरुण माहेश्वरी भांजा नीरव मोदी महाराजा से अपनी रफ्तो-जब्त के बल पर बैंकों से कोरी पुर्जियां निकलवा कर हजारों करोड़ रुपये की चपत लगा क...
मंगलवार, 20 फ़रवरी 2018

'यहां गुलाब, नाचो यहां !'

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—अरुण माहेश्वरी जो भी मार्क्स के साहित्य से थोड़ा परिचित है, वह उनकी कृति 'लूई बोनापार्ट की अठारहवीं ब्रुमेर' के महत्व को जान...
रविवार, 18 फ़रवरी 2018

अपने अपने राष्ट्रवाद और मार्क्सवाद

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—अरुण माहेश्वरी मानव सभ्यता का इतिहास जिन तमाम बातों से निर्मित हुआ है , वे सब अगर झूठ या आधी-अधूरी साबित न होती तो क्या मानव समाज ...
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Arun Maheshwari
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