चतुर्दिक

विषय पर केंद्रित होने पर स्वयं विषय का स्वरूप बदल जाता है (द्वंद्वात्मक भौतिकवाद में मनन का स्थान ) ; विकल्प का निर्विकल्प में विश्रांति ही तत्व है ; इस प्रकार उत्तरोत्तर विश्रांति के द्वारा अपना स्वरूप स्फुट होता है - यह शेष है ।

मंगलवार, 20 नवंबर 2018

कहानी में आत्म की विमर्शमयता का पहलू

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(‘ लहक ’ के नये अंक में नीलकांत जी की टिप्पणी पर एक टिप्पणी  ) आज ही ‘ लहक ’ पत्रिका का नया अंक मिला । शु...
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Arun Maheshwari
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