चतुर्दिक

विषय पर केंद्रित होने पर स्वयं विषय का स्वरूप बदल जाता है (द्वंद्वात्मक भौतिकवाद में मनन का स्थान ) ; विकल्प का निर्विकल्प में विश्रांति ही तत्व है ; इस प्रकार उत्तरोत्तर विश्रांति के द्वारा अपना स्वरूप स्फुट होता है - यह शेष है ।

बुधवार, 20 मार्च 2019

मोदी की मनोदशा और भाजपा के लिये उसके अशनि संकेत

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—अरुण माहेश्वरी मोदी जिस प्रकार से बिना सोचे-समझे अपने सब लोगों को चौकीदार बनाने में लग गये हैं, मनोविश्लेषण की भाषा में इसे जुनूनी व...
रविवार, 17 मार्च 2019

आत्म-हनन के पथ पर मोदी !

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- अरुण माहेश्वरी   किसी भी सामाजिक - राजनीतिक परिघटना के पीछे कोई एक कारण नहीं होता है । यह जीवन के अनेक कारणों क...
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Arun Maheshwari
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