चतुर्दिक

विषय पर केंद्रित होने पर स्वयं विषय का स्वरूप बदल जाता है (द्वंद्वात्मक भौतिकवाद में मनन का स्थान ) ; विकल्प का निर्विकल्प में विश्रांति ही तत्व है ; इस प्रकार उत्तरोत्तर विश्रांति के द्वारा अपना स्वरूप स्फुट होता है - यह शेष है ।

रविवार, 23 जून 2019

भारतेन्दु बाबू के प्रणय-प्रेम की एक कथा — 'मल्लिका'

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—अरुण माहेश्वरी आज मनीषा कुलश्रेष्ठ का हाल में प्रकाशित उपन्यास 'मल्लिका' पढ़ गया । मल्लिका, बंकिम चंद्र चटोपाध्याय की ममेरी ब...
शुक्रवार, 7 जून 2019

इसे कहते हैं अव्यवस्थित विचार बुद्धि

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-अरुण माहेश्वरी आज के टेलिग्राफ़ में रामचंद्र गुहा का लेख है - ‘शाश्वत बुद्धिमत्ता’ (Timeless Wisdom) । इस लेख के मूल में है 14 वीं स...
सोमवार, 3 जून 2019

ब्लाग लेखन के तर्क

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('स्वातंत्र्य चेतना का स्फोट' के छठें खंड की भूमिका) ज्ञात का अनुसंधानात्मक निरूपण । जिस वस्तु के गुणावगुण से आप अज्ञात हो, उ...

'मार्क्सवाद सर्वशक्तिमान है'

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('बनना कार्ल मार्क्स का' पुस्तक की भूमिका) लेनिन ने मार्क्स के बारे में अपने प्रसिद्ध निबंध 'मार्क्सवाद के तीन स्रोत तथा त...
शनिवार, 1 जून 2019

मन की संरचना और आधुनिक मनुष्य का आत्म-अलगाव

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—अरुण माहेश्वरी 'कथा' पत्रिका के सद्य प्रकाशित 22वें अंक में मुक्तिबोध के बारे में रामजी राय का एक लेख है — 'आत्म-अलगाव (...
मंगलवार, 28 मई 2019

बहुलता के हुड़दंगी परिदृश्य में से तानाशाही के सही प्रत्युत्तर की तलाश

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—अरुण माहेश्वरी फेसबुक पर लखनऊ के हिंदी के आलोचक वीरेन्द्र यादव की वाल पर 22 मई को श्री लक्ष्मण यादव की एक पोस्ट पर हमारी नजर पड़ी जि...
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Arun Maheshwari
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