चतुर्दिक

विषय पर केंद्रित होने पर स्वयं विषय का स्वरूप बदल जाता है (द्वंद्वात्मक भौतिकवाद में मनन का स्थान ) ; विकल्प का निर्विकल्प में विश्रांति ही तत्व है ; इस प्रकार उत्तरोत्तर विश्रांति के द्वारा अपना स्वरूप स्फुट होता है - यह शेष है ।

शुक्रवार, 12 जून 2020

अंधेरे खंडहरों में बिलबिलाती जिंदगियां

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¬ गुलाबो सिताबो पर क्षण भर —अरुण माहेश्वरी आदमी की भौतिक दरिद्रता उसकी मानसिक दरिद्रता का भी कारण बनती है । वह अपने अस्तित्व के ल...
शुक्रवार, 5 जून 2020

ऐसा भी होता है !

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दो दिन पहले भारत का सबसे बड़ा साइकिल बनाने का एटलस का कारखाना बंद हो गया । एटलस के बंद होने ने हमारे लिए बंगाल के सेन रेले कारखाने की या...
शनिवार, 30 मई 2020

‘सिधपुर की भगतणें’ : प्रमादग्रस्त स्त्रियों की शील कथा

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— अरुण माहेश्वरी  लगभग तीन साल पहले अपनी एक ट्रेन यात्रा में हमने इस उपन्यास को पढ़ने की कोशिश की थी । उसे इसलिये महज एक कोशिश ...
गुरुवार, 30 अप्रैल 2020

अथातो चित्त जिज्ञासा (12)

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(जॉक लकान के मनोविश्लेषण के सिद्धांतों पर केंद्रित एक विमर्श की प्रस्तावना) —अरुण माहेश्वरी जाक लकान (13 अप्रैल 1901 — 9 सितंबर ...
मंगलवार, 21 अप्रैल 2020

अथातो चित्त जिज्ञासा (11)

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(जॉक लकान के मनोविश्लेषण के सिद्धांतों पर केंद्रित एक विमर्श की प्रस्तावना) —अरुण माहेश्वरी जाक लकान (13 अप्रैल 1901 — 9 सितंबर...
बुधवार, 15 अप्रैल 2020

अथातो चित्त जिज्ञासा (10)

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(जॉक लकान के मनोविश्लेषण के सिद्धांतों पर केंद्रित एक विमर्श की प्रस्तावना) —अरुण माहेश्वरी जाक लकान (13 अप्रैल 1901 — 9 सितंबर ...
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Arun Maheshwari
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