चतुर्दिक

विषय पर केंद्रित होने पर स्वयं विषय का स्वरूप बदल जाता है (द्वंद्वात्मक भौतिकवाद में मनन का स्थान ) ; विकल्प का निर्विकल्प में विश्रांति ही तत्व है ; इस प्रकार उत्तरोत्तर विश्रांति के द्वारा अपना स्वरूप स्फुट होता है - यह शेष है ।

सोमवार, 6 जुलाई 2020

भारत-चीन सहयोग और समर्थन विश्व राजनीति के नक़्शे को पूरी तरह से बदल सकता है

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— अरुण   माहेश्वरी   खबरें आ रही है कि गलवान घाटी और दूसरे कई स्थानों पर भी चीन और भारत, दोनों ने अपनी सेनाओं को पीछे हटाना शुरू क...
शनिवार, 4 जुलाई 2020

आलोचना के एक सर्वकालिक ढांचे की तलाश में —

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—अरुण माहेश्वरी  (यह लेख ‘अनहद’ पत्रिका के नये अंक में प्रकाशित हो रहा है, जिसके मुखपृष्ठ की तस्वीर यहाँ दी गई है :) 1989  में...
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Arun Maheshwari
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