चतुर्दिक

विषय पर केंद्रित होने पर स्वयं विषय का स्वरूप बदल जाता है (द्वंद्वात्मक भौतिकवाद में मनन का स्थान ) ; विकल्प का निर्विकल्प में विश्रांति ही तत्व है ; इस प्रकार उत्तरोत्तर विश्रांति के द्वारा अपना स्वरूप स्फुट होता है - यह शेष है ।

शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2020

बंगाल के चुनाव के संकेतों को पकड़ने का एक आधार

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  —अरुण माहेश्वरी   बंगाल में 2021 के चुनावी रण की बिसात पर वाम-कांग्रेस के गठजोड़ के साथ पहला बड़ा राजनीतिक कदम उठा लिया गया है । इन दोनों ...
मंगलवार, 6 अक्टूबर 2020

गुरु गंभीर भाषा के दंश के शिकार ‘गंभीर आदमी’ !

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  अरुण माहेश्वरी कल मनु जोसेफ के पहले उपन्यास पर आधारित सुधीर मिश्रा की फिल्म, भारत सरकार के एक वैज्ञानिक आचार्या के अनुसूचित जाति के क्लर्क...
बुधवार, 30 सितंबर 2020

एक पत्रिका के पृष्ठों पर बोलते साहित्य जगत पर दृष्टिपात

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   —अरुण माहेश्वरी पांच दिन पहले ‘आलोचना’ पत्रिका का 62वां (अक्तूबर-दिसंबर 2019) अंक मिला । कोई विशेषांक नहीं, एक सामान्य अंक । आज के काल मे...
मंगलवार, 22 सितंबर 2020

कृषि क़ानून मोदी की कब्र साबित होंगे

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- अरुण   माहेश्वरी   मोदी   के   कृषि   क़ानून   कृषि   क्षेत्र   में   पूंजी   के   एकाधिकार   की   स्थापना   के   क़ानून   हैं   ।   आगे  ...
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Arun Maheshwari
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