चतुर्दिक

विषय पर केंद्रित होने पर स्वयं विषय का स्वरूप बदल जाता है (द्वंद्वात्मक भौतिकवाद में मनन का स्थान ) ; विकल्प का निर्विकल्प में विश्रांति ही तत्व है ; इस प्रकार उत्तरोत्तर विश्रांति के द्वारा अपना स्वरूप स्फुट होता है - यह शेष है ।

रविवार, 29 अगस्त 2021

अफ़ग़ानिस्तान: पुरातनपंथी जुझारूपन कहीं भी स्थिरता नहीं ला सकता

›
  - अरुण   माहेश्वरी   अफ़ग़ानिस्तान   में   हामिद   करजाई   और   अब्दुल्ला   अब्दुल्ला   जैसे   नेताओं   से   पहले   वार्ता   और   उसके   ब...
‹
›
मुख्यपृष्ठ
वेब वर्शन देखें

मेरे बारे में

Arun Maheshwari
मेरा पूरा प्रोफ़ाइल देखें
Blogger द्वारा संचालित.