चतुर्दिक

विषय पर केंद्रित होने पर स्वयं विषय का स्वरूप बदल जाता है (द्वंद्वात्मक भौतिकवाद में मनन का स्थान ) ; विकल्प का निर्विकल्प में विश्रांति ही तत्व है ; इस प्रकार उत्तरोत्तर विश्रांति के द्वारा अपना स्वरूप स्फुट होता है - यह शेष है ।

शुक्रवार, 25 फ़रवरी 2022

मोदी जी आख़िर इतनी बेतुकी बातें क्यों कर रहे हैं ?

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  — अरुण   माहेश्वरी   सब   लोग   अब   यह   गौर   करने   लगे   हैं   कि   यूपी   के   चुनाव   में   मोदी   के   भाषण   कुछ अजीबोग़रीब   हो  ...
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सोमवार, 21 फ़रवरी 2022

‘जीते जी इलाहाबाद’ : जहां जमुना के छलिया जल जैसे इलाहाबाद के सत्य से आँखें दो-चार होती हैं !

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  — अरुण माहेश्वरी दो दिन पहले ही ममता कालिया जी की किताब ‘जीते जी इलाहाबाद’ हासिल हुई और पूरी किताब लगभग एक साँस में पढ़ गया । इलाहाबाद क...
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Arun Maheshwari
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