चतुर्दिक

विषय पर केंद्रित होने पर स्वयं विषय का स्वरूप बदल जाता है (द्वंद्वात्मक भौतिकवाद में मनन का स्थान ) ; विकल्प का निर्विकल्प में विश्रांति ही तत्व है ; इस प्रकार उत्तरोत्तर विश्रांति के द्वारा अपना स्वरूप स्फुट होता है - यह शेष है ।

बुधवार, 11 मई 2022

मंटो, राजकमल चौधरी और इसराइल

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(मंटो के जन्मदिन के अवसर पर एक विचार) — अरुण माहेश्वरी मंटो   और   राजकमल   चौधरी ,  इन   दो   लेखकों   की   तुलना   करना   ही   नितांत   बे...
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Arun Maheshwari
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