चतुर्दिक

विषय पर केंद्रित होने पर स्वयं विषय का स्वरूप बदल जाता है (द्वंद्वात्मक भौतिकवाद में मनन का स्थान ) ; विकल्प का निर्विकल्प में विश्रांति ही तत्व है ; इस प्रकार उत्तरोत्तर विश्रांति के द्वारा अपना स्वरूप स्फुट होता है - यह शेष है ।

शनिवार, 30 जुलाई 2022

पुरस्कारों के लिये सर्वथा निरापद एक सरियलिस्ट उपन्यास : ‘रेत समाधि’

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( प्रेमचंद जयंती पर एक कथा-विमर्श ) —अरुण माहेश्वरी आज कथा सम्राट प्रेमचंद की 143वीं जयंती का दिन है । सम्राट, अर्थात् हेगेलियन अवधारणा के अ...
सोमवार, 27 जून 2022

एक प्रत्युत्तर

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(25 जून 2022 को नई दिल्ली के हरकिशन सिंह सुरजीत भवन में 'अथातो चित्त जिज्ञासा' के विमोचन समारोह में अरुण माहेश्वरी का वक्तव्य)   य...
बुधवार, 11 मई 2022

मंटो, राजकमल चौधरी और इसराइल

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(मंटो के जन्मदिन के अवसर पर एक विचार) — अरुण माहेश्वरी मंटो   और   राजकमल   चौधरी ,  इन   दो   लेखकों   की   तुलना   करना   ही   नितांत   बे...
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Arun Maheshwari
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