चतुर्दिक

विषय पर केंद्रित होने पर स्वयं विषय का स्वरूप बदल जाता है (द्वंद्वात्मक भौतिकवाद में मनन का स्थान ) ; विकल्प का निर्विकल्प में विश्रांति ही तत्व है ; इस प्रकार उत्तरोत्तर विश्रांति के द्वारा अपना स्वरूप स्फुट होता है - यह शेष है ।

बुधवार, 22 फ़रवरी 2023

मनुष्य क्या है ?

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  गांधी-गोडसे वितंडा पर असग़र वजाहत ने एक जगह अपनी सफ़ाई में लिखा है — मनुष्य मनुष्य होता है, कोई देवता नहीं होता । गांधी भी एक मनुष्य थे और...
सोमवार, 5 दिसंबर 2022

प्रतिवाद को क्या शब्दों का अभाव !

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  —अरुण माहेश्वरी एक युग हुआ । सन् 2010 के बसंत का महीना था । तब अरब देशों में ‘सदियों’ की तानाशाहियों की घुटन में बसंत की एक नई बहार आई थी ...
शुक्रवार, 2 दिसंबर 2022

अपने उद्देश्य की सही दिशा में सफलता से आगे बढ़ रही है — भारत जोड़ो यात्रा

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  — अरुण माहेश्वरी  इसमें कोई शक नहीं है कि राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस की ‘भारत जोड़ो यात्रा‘ कांग्रेस नामक राजनीतिक दल से जुड़ी उस...
गुरुवार, 1 दिसंबर 2022

रवीश कुमार ज़िंदाबाद !

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  —  अरुण   माहेश्वरी   मोदी-अडानी, अर्थात् सरकार-कारपोरेट की धुरी का एनडीटीवी पर झपट्टा भारत के मीडिया जगत में एक घटना के तौर पर दर्ज हुआ ह...
बुधवार, 16 नवंबर 2022

गालियाँ और मोदी जी !

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—अरुण माहेश्वरी  मोदी जी अक्सर हर थोड़े दिनों के अंतराल पर गालियों और कुत्साओं की गलियों में भटकते हुए पाए जाते हैं ।  या तो वे खुद अन्य लोग...
बुधवार, 2 नवंबर 2022

विमर्श के लिए शब्द ज़रूरी नहीं होते हैं

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—अरुण माहेश्वरी  अभी   चंद   रोज़   पहले   कोलकाता   में   गीतांजलि   श्री   जी   आई   थीं।   प्रश्नोत्तर   के   एक   उथले   से   सत्र   के ...
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Arun Maheshwari
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