चतुर्दिक

विषय पर केंद्रित होने पर स्वयं विषय का स्वरूप बदल जाता है (द्वंद्वात्मक भौतिकवाद में मनन का स्थान ) ; विकल्प का निर्विकल्प में विश्रांति ही तत्व है ; इस प्रकार उत्तरोत्तर विश्रांति के द्वारा अपना स्वरूप स्फुट होता है - यह शेष है ।

मंगलवार, 21 नवंबर 2023

रेवड़ियाँ और उनकी राजनीतिक महत्ता

›
-अरुण माहेश्वरी   क्रांतिकारी वामपंथी राजनीति में बहस का यह एक पुराना विषय रहा है कि जब किसी विश्व परिस्थिति में क्रांति का पुराना रूप संभव ...
शुक्रवार, 27 अक्टूबर 2023

चुनाव के ऐन वक्त ईडी की करतूतें क्या कहती है ?

›
— अरुण माहेश्वरी जैसे जैसे पांच राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव क़रीब आ रहे हैं, मोदी में अपनी शक्ति के क्षरण के लक्षण तेज़ी के साथ प्रगट होन...
शनिवार, 21 अक्टूबर 2023

रवीश, श्रीमंत लुकास और विनय घोष

›
  कल रवीश कुमार अपने एक ट्वीट में अमेरिका के रोह्वी आइलैंड राज्य के प्रोविडेंस शहर में ‘सिम्पोजियम’ नाम की किताबों की एक दुकान का अनुभव साझा...
सोमवार, 11 सितंबर 2023

एक नई वैश्विक भूमिका के मुक़ाम पर भारत

›
  ( भारत   की   राजनीति   में   अघटन  (catastrophe) की   कुछ   बिल्कुल   ताज़ा   सूरतें )    — अरुण   माहेश्वरी   अघटन ऐसा कोई आसन्न विध्वंस...
गुरुवार, 24 अगस्त 2023

ज़िन्दगी तमाशा

›
  कल   यूट्यूब   पर   बहुचर्चित ,  कई   अन्तर्राष्ट्रीय   पुरस्कारों   से   नवाज़ी   जा   चुकी   पाकिस्तानी   फ़िल्म  ‘ ज़िंदगी   तमाशा ’  द...
‹
›
मुख्यपृष्ठ
वेब वर्शन देखें

मेरे बारे में

Arun Maheshwari
मेरा पूरा प्रोफ़ाइल देखें
Blogger द्वारा संचालित.