चतुर्दिक

विषय पर केंद्रित होने पर स्वयं विषय का स्वरूप बदल जाता है (द्वंद्वात्मक भौतिकवाद में मनन का स्थान ) ; विकल्प का निर्विकल्प में विश्रांति ही तत्व है ; इस प्रकार उत्तरोत्तर विश्रांति के द्वारा अपना स्वरूप स्फुट होता है - यह शेष है ।

बुधवार, 27 दिसंबर 2023

रामजन्मभूमि प्रसंग पर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले की व्याख्या भारत के संविधान से इंकार के अलावा और कुछ भी संभव नहीं है

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— अरुण माहेश्वरी  आज के टेलिग्राफ में राम मंदिर के प्रसंग में हिलाल अहमद का एक लेख है — राम मंदिर : एक वैकल्पिक परिप्रेक्ष्य ; एक भिन्न दृष्...
शनिवार, 16 दिसंबर 2023

संवैधानिक इतिहास में हमारे वर्तमान सीजेआई का स्थान !

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  —अरुण माहेश्वरी   धारा 370 और इससे जुड़े अन्य प्रसंगों पर राय देते हुए सुप्रीम कोर्ट की पाँच जजों की संविधान पीठ ने 3:2 के फ़ैसले में कहा ...
सोमवार, 11 दिसंबर 2023

पाँच राज्यों के चुनाव परिणाम के और भविष्य के संकेतों पर क नज़र

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—अरुण माहेश्वरी   भारत को अगर कोई हिटलर की तर्ज़ के हत्यारे फासीवाद से बचाना चाहता है तो उसके सामने एक ही विकल्प शेष रह गया है — कांग्रेस और...
मंगलवार, 21 नवंबर 2023

रेवड़ियाँ और उनकी राजनीतिक महत्ता

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-अरुण माहेश्वरी   क्रांतिकारी वामपंथी राजनीति में बहस का यह एक पुराना विषय रहा है कि जब किसी विश्व परिस्थिति में क्रांति का पुराना रूप संभव ...
शुक्रवार, 27 अक्टूबर 2023

चुनाव के ऐन वक्त ईडी की करतूतें क्या कहती है ?

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— अरुण माहेश्वरी जैसे जैसे पांच राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव क़रीब आ रहे हैं, मोदी में अपनी शक्ति के क्षरण के लक्षण तेज़ी के साथ प्रगट होन...
शनिवार, 21 अक्टूबर 2023

रवीश, श्रीमंत लुकास और विनय घोष

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  कल रवीश कुमार अपने एक ट्वीट में अमेरिका के रोह्वी आइलैंड राज्य के प्रोविडेंस शहर में ‘सिम्पोजियम’ नाम की किताबों की एक दुकान का अनुभव साझा...
सोमवार, 11 सितंबर 2023

एक नई वैश्विक भूमिका के मुक़ाम पर भारत

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  ( भारत   की   राजनीति   में   अघटन  (catastrophe) की   कुछ   बिल्कुल   ताज़ा   सूरतें )    — अरुण   माहेश्वरी   अघटन ऐसा कोई आसन्न विध्वंस...
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Arun Maheshwari
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