चतुर्दिक

विषय पर केंद्रित होने पर स्वयं विषय का स्वरूप बदल जाता है (द्वंद्वात्मक भौतिकवाद में मनन का स्थान ) ; विकल्प का निर्विकल्प में विश्रांति ही तत्व है ; इस प्रकार उत्तरोत्तर विश्रांति के द्वारा अपना स्वरूप स्फुट होता है - यह शेष है ।

मंगलवार, 30 जनवरी 2024

विकृत किए गए शब्द भी अपने मूल अर्थ में लौटा करते हैं

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  (आज के ‘टेलिग्राफ’ में जी एन देवी के लेख पर)  —अरुण माहेश्वरी  ‘टेलिग्राफ’ में अपने साठवें लेख में श्री जी एन देवी ने कहा था कि अब आगे वे ...

‘टेलिग्राफ का संपादकीय पृष्ठ और जी एन देवी का लेख

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15 जून 2023 −अरुण माहेश्वरी ‘टेलिग्राफ’ अखबार के संपादकीय पृष्ठ में कुछ लेखकों के लेख अक्सर हमारा ध्यान आकर्षित करते हैं । उनमें उठाये गये व...
शुक्रवार, 19 जनवरी 2024

क्या सीजेआई का ज्ञान ही उनका दुश्मन बन गया है ?

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(सीजेआई चंद्रचूड़ पर एक मनोविश्लेषणात्मक टिप्पणी)  —अरुण माहेश्वरी  आज क़ानून संबंधी विमर्शों की जानकारी रखने वाला हर व्यक्ति यह जान चुका है...
शुक्रवार, 12 जनवरी 2024

क्या आरएसएस और शंकराचार्यों के बीच का तनाव अब अपनी ऐतिहासिक तार्किक परिणति की दिशा में बढ़ रहा है ?

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— अरुण माहेश्वरी   राम मंदिर पर शंकराचार्यों के द्वारा उठाए गए धर्मशास्त्रीय विवाद में अब स्थिति साफ़ तौर पर उस तार्किक परिणति तक जाती हुई द...
बुधवार, 3 जनवरी 2024

भारतीय न्यायपालिका में पोस्ट-ट्रुथ युग

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—अरुण माहेश्वरी   नये साल के प्रारंभ के साथ ही जब 3 जनवरी को अडानी समूह की अपने शेयरों की क़ीमतों के मामले में हेराफेरियों के बारे में प्रसि...
बुधवार, 27 दिसंबर 2023

रामजन्मभूमि प्रसंग पर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले की व्याख्या भारत के संविधान से इंकार के अलावा और कुछ भी संभव नहीं है

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— अरुण माहेश्वरी  आज के टेलिग्राफ में राम मंदिर के प्रसंग में हिलाल अहमद का एक लेख है — राम मंदिर : एक वैकल्पिक परिप्रेक्ष्य ; एक भिन्न दृष्...
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Arun Maheshwari
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