चतुर्दिक

विषय पर केंद्रित होने पर स्वयं विषय का स्वरूप बदल जाता है (द्वंद्वात्मक भौतिकवाद में मनन का स्थान ) ; विकल्प का निर्विकल्प में विश्रांति ही तत्व है ; इस प्रकार उत्तरोत्तर विश्रांति के द्वारा अपना स्वरूप स्फुट होता है - यह शेष है ।

शुक्रवार, 13 सितंबर 2024

कामरेड सीताराम येचुरी लाल सलाम !

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  (वाम-जनतांत्रिक राजनीति का एक बेहद आकर्षक व्यक्तित्व नहीं रहा) − अरुण माहेश्वरी   कामरेड सीताराम येचुरी हमारे बीच नहीं रहे । उनका इस...
गुरुवार, 8 अगस्त 2024

हंसा जाई अकेला

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(आज सुबह फेफड़ों की लंबी बीमारी के बाद कामरेड बुद्धदेव  भट्टाचार्य नहीं रहे ।मृत्यु के वक्त उनकी उम्र अस्सी साल थी। उनके परिजनों में उनके प...
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मंगलवार, 25 जून 2024

मृत्युमुखी मोदी सरकार !

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—अरुण माहेश्वरी   मोदी-3    तेज़ी के साथ एक death-drive (मृत्यु उद्दीपन) में फँसी हुई दिखाई देने लगी है । यह सच अनायास ही हमें फ्रायड और जॉक...

क्या मोदी मनोविश्लेषण का एक खास विषय बन चुके हैं !

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— अरुण माहेश्वरी   अपने पुराने मंत्रिमंडल को ही दोहरा कर, ख़ास तौर पर अमित शाह को गृहमंत्री और ओम बिड़ला को फिर से स्पीकर पद के लिए उतार कर ...
गुरुवार, 20 जून 2024

राहुल गांधी के जन्मदिन के बहाने सामाजिक-राजनीतिक विमर्श के मनोविश्लेषण के औजार पर क्षण भर

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  −अरुण माहेश्वरी कल राहुल गांधी का जन्मदिन था । वे 54 साल के पूरे हो गए । सोशल मीडिया पर राहुल के जन्मदिन की धूम थी । कांग्रेस के कार्यकर्त...
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शनिवार, 8 जून 2024

‘ईश्वर मर गया है’

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(चुनाव पर एक टिप्पणी)   — अरुण माहेश्वरी  ‘ईश्वर मर गया है । अब ऐसा लगता है कि उसकी प्रेत छाया मंडराती रहेगी।’ नित्शे का यह कथन तब यथार्थ मे...
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Arun Maheshwari
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