चतुर्दिक

विषय पर केंद्रित होने पर स्वयं विषय का स्वरूप बदल जाता है (द्वंद्वात्मक भौतिकवाद में मनन का स्थान ) ; विकल्प का निर्विकल्प में विश्रांति ही तत्व है ; इस प्रकार उत्तरोत्तर विश्रांति के द्वारा अपना स्वरूप स्फुट होता है - यह शेष है ।

शुक्रवार, 28 फ़रवरी 2025

शिवरात्रि में जो छूट गया !

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 -अरुण माहेश्वरी  शिवरात्रि बीत गई। कुंभ की भीड़ में मल-मूत्र और मुनाफ़े के पहाड़ समान बिंब के पीछे शिव और शक्ति के योग का वह सुंदर बिंब कही...
गुरुवार, 27 फ़रवरी 2025

कविता कृष्णपल्लवी के एक सघन काव्य बिंब* का लकानियन विश्लेषण :

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अरुण माहेश्वरी  एक दिलचस्प और चौंकाने वाला सघन बिंब जिसकी बहुस्तरीयता इसकी थोड़ी विस्तृत मनोविश्लेषणात्मक व्याख्या के लिए उकसाती है ।  पहाड़...
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शनिवार, 22 फ़रवरी 2025

भारत-अमेरिका संबंधों का सबसे शर्मनाक काल : यह आरएसएस के अंग्रेज़-परस्ती के पुराने इतिहास की पुनरावृत्ति का ही एक परिणाम है

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— अरुण माहेश्वरी   ट्रंप -2 के शासन का अब तक का यह काल हमें अभी से भारत-अमेरिकी संबंधों के इतिहास का सबसे शर्मनाक काल दिखाई देने लगा है ।  इ...
सोमवार, 3 फ़रवरी 2025

‘भक्तिवाद और भक्ति’: ‘आधुनिकता और रूमानियत’

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−अरुण माहेश्वरी  ‘भक्तिवाद और भक्ति’: ‘आधुनिकता और रूमानियत’ −अरुण माहेश्वरी कल (1 फरवरी 2025) के टेलिग्राफ में प्रसिद्ध भाषा शास्त्री जी. ए...
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