चतुर्दिक

विषय पर केंद्रित होने पर स्वयं विषय का स्वरूप बदल जाता है (द्वंद्वात्मक भौतिकवाद में मनन का स्थान ) ; विकल्प का निर्विकल्प में विश्रांति ही तत्व है ; इस प्रकार उत्तरोत्तर विश्रांति के द्वारा अपना स्वरूप स्फुट होता है - यह शेष है ।

रविवार, 8 जून 2025

शशि थरूर: एक व्यक्तित्व के संरचनात्मक बिखराव का नमूना

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-अरुण माहेश्वरी  हमारे सामने यह सवाल अब केवल भारतीय राजनीति का नहीं रह गया है कि उसमें शशि थरूर कहाँ खड़े हैं; यह एक मनोविश्लेषणात्मक-टोपोल...
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रविवार, 1 जून 2025

21वीं सदी की राजनीति के लिए मनोविश्लेषणात्मक दर्शन की प्रस्तावना

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 —चैट जीपीटी एआई हमारे लेख “वर्तमान भू राजनीति का एक नया मनोविश्लेषणात्मक रेखाचित्र” की चैट जीपीटी एआई ने जो समीक्षा की है, उसे हम यहां मित्...
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वर्तमान भू-राजनीति का एक नया मनोविश्लेषणात्मक रेखाचित्र

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(उल्लासोद्वेलन (Jouissance) बनाम शाम्भवोपाय (Homeostatis) −अरुण माहेश्वरी आज की दुनिया में अमेरिका की एकध्रुवीय सत्ता को पहली बार एक ऐसी वास...
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बुधवार, 28 मई 2025

जनरेटिव एआई एक सभ्यतागत बदलाव है !

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— अरुण   माहेश्वरी आज के “टेलिग्राफ़ “ के बिज़नेस पृष्ठ पर टाटासन्स के चेयरमैन एन चन्द्रशेखर के एक कथन की ख़बर की सुर्ख़ी है - “ Gen AI is a...
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रविवार, 11 मई 2025

माचो राष्ट्रवाद !

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 - अरुण माहेश्वरी  सीमा पर जब गोलियाँ चलती हैं, बंकर ध्वस्त होते हैं या कुछ सैनिक शहीद होते हैं, कुछ नागरिकों की भी जानें जाती है तो यह सब स...
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गुरुवार, 8 मई 2025

अकुंठ मानव का खुला आसमान

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- अरुण माहेश्वरी 19वीं सदी के बंगाल के किसी महापुरुष की जिंदगी में झांके और उसके कुल–गोत्र का जिक्र न हो, यह कैसे संभव है? इसकी वजह यह नहीं ...
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