चतुर्दिक

विषय पर केंद्रित होने पर स्वयं विषय का स्वरूप बदल जाता है (द्वंद्वात्मक भौतिकवाद में मनन का स्थान ) ; विकल्प का निर्विकल्प में विश्रांति ही तत्व है ; इस प्रकार उत्तरोत्तर विश्रांति के द्वारा अपना स्वरूप स्फुट होता है - यह शेष है ।

शुक्रवार, 24 अप्रैल 2026

बंगाल-चुनाव के मध्य वामपंथ पर एक क्षण

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- अरुण माहेश्वरी बंगाल में वाम के उम्मीदवारों और प्रचार को देखते हुए बार-बार यह एहसास होता है कि जैसे भारतीय वामपंथ ने भीतर ही भीतर मान लिया...
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मंगलवार, 21 अप्रैल 2026

एक दलील

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 (अमेरिका-इजरायल-ईरान युद्ध पर चर्चा के केंद्र में नई विश्व-व्यवस्था के उदय के प्रश्न को उठाने के पक्ष में):  −अरुण माहेश्वरी अमेरिका-इज़राय...
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गुरुवार, 16 अप्रैल 2026

प्रकृत मानवीय विकल्प के उभार तक यथास्थिति ही बनी रहेगी

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 ( पश्चिम बंगाल में एक अजीब सी विडंबना में फँसा मतदाता ) —अरुण माहेश्वरी   बंगाल की राजनीति का आज का संकट केवल इस बात का संकट नहीं है कि कौन...
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गुरुवार, 2 अप्रैल 2026

क्या अमेरिकी साम्राज्यवाद आत्म-हत्या की दिशा में नहीं बढ़ रहा है!

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  -अरुण माहेश्वरी   ईरान पर अमेरिका-इज़रायल के हमले के वर्तमान चरण में हम एक बार फिर यह दोहराना चाहते हैं अमेरिका की संपूर्ण मध्यपूर्व की नी...
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शुक्रवार, 13 मार्च 2026

‘अब युद्ध का अंत ईरान ही करेगा !’

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(इस युद्ध के सत्य के उद्घाटक, घटनामूलक (evental) चरित्र पर एक टिप्पणी) −अरुण माहेश्वरी   ईरान-अमेरिका युद्ध अब महज एक राजनीतिक या सैन्य घटना...
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सोमवार, 2 मार्च 2026

ईरान युद्ध, तेल और प्रभुत्व की चिंता से जुड़ी अमेरिकी बदहवासी

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(अमेरिकी प्रमाता के संकट की एक मनोविश्लेषणात्मक-भूराजनीतिक व्याख्या की कोशिश)  – अरुण माहेश्वरी आज ईरान के साथ अमेरिका और उसके सहयोगियों का ...
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