चतुर्दिक

विषय पर केंद्रित होने पर स्वयं विषय का स्वरूप बदल जाता है (द्वंद्वात्मक भौतिकवाद में मनन का स्थान ) ; विकल्प का निर्विकल्प में विश्रांति ही तत्व है ; इस प्रकार उत्तरोत्तर विश्रांति के द्वारा अपना स्वरूप स्फुट होता है - यह शेष है ।

शनिवार, 18 जनवरी 2014

सुचित्रा सेन : एक खुबसूरत पहेली

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सुचित्रा सेन : एक खुबसूरत पहेली * आज कोलकाता के अखबार सुचित्रा सेन की खबरों से भरे हुए हैं। पचीस साल (1953-1978...
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Arun Maheshwari
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