चतुर्दिक

विषय पर केंद्रित होने पर स्वयं विषय का स्वरूप बदल जाता है (द्वंद्वात्मक भौतिकवाद में मनन का स्थान ) ; विकल्प का निर्विकल्प में विश्रांति ही तत्व है ; इस प्रकार उत्तरोत्तर विश्रांति के द्वारा अपना स्वरूप स्फुट होता है - यह शेष है ।

बुधवार, 26 नवंबर 2014

कश्मीर में भारी मतदान

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कश्मीर में चुनाव के पहले चरण में भारी मतदान - सब ख़ुश है कि जनतंत्र जीत गया । सवाल है कि जनतंत्र की जीत क्या सिर्फ मतदान में हैं या कुछ औ...
शनिवार, 22 नवंबर 2014

कौन आगे - भारत या पाकिस्तान !

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सबसे पहले प्रधानमंत्री ने ट्वीट करके दुनिया को ओबामा को भेजे गये निमंत्रण के बारे में बताया । अमेरिका इस पर कोई प्रतिक्रिया दे, उसके प...
शनिवार, 15 नवंबर 2014

मनुष्यता का भविष्य !

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अरुण माहेश्वरी आज सन माउक्रोसिस्टम्स के सह-संस्थापक, कमप्यूटर तकनीक के क्षेत्र के एक बादशाह विनोद खोसला की 11 जून 2014 की फोर्ब्स प...

मुक्तिबोध

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मुक्तिबोध के जन्मदिन (13 नवंबर) के अवसर पर उन्हें याद करते हुए : अरुण माहेश्वरी मुक्तिबोध ने जीवन में खूब लिखा। नेमीचंद जैन ने छ: ख...
शुक्रवार, 14 नवंबर 2014

नेहरू और उनकी विचारधारा

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अरुण माहेश्वरी (नेहरू जी की 125वीं जयंती के अवसर पर हम यहां ईएमएस नम्बुदिरिपाद की पुस्तक ‘‘नेहरू आइडियोलोजी एण्ड प्रेक्टिस’’ (नेहरू, व...
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Arun Maheshwari
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