चतुर्दिक

विषय पर केंद्रित होने पर स्वयं विषय का स्वरूप बदल जाता है (द्वंद्वात्मक भौतिकवाद में मनन का स्थान ) ; विकल्प का निर्विकल्प में विश्रांति ही तत्व है ; इस प्रकार उत्तरोत्तर विश्रांति के द्वारा अपना स्वरूप स्फुट होता है - यह शेष है ।

बुधवार, 29 जुलाई 2015

‘साहित्य नगर’ के स्वघोषित महापौर की विडंबनाएं

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अरुण माहेश्वरी आज (16 अप्रैल 2015) ‘इंडिया टीवी’ पर हिटलर के यातना शिविर औस्वित्श पर एक रिपोर्ट दिखाई जा रही थी। औस्वित्श अर्थात हिटल...
गुरुवार, 9 जुलाई 2015

ग्रीस का संकट या यूरोपीय पूंजीवाद का संकट !

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अरुण माहेश्वरी ग्रीस के लोगों ने भारी बहुमत के साथ अपनी सरकार के इस प्रस्ताव को स्वीकार लिया है कि वे आर्थिक मामलों में किसी भी महाजन द...
मंगलवार, 7 जुलाई 2015

मनोविज्ञान की यह कैसी समझ !

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अरुण माहेश्वरी आज (7 जुलाई 2015) के जनसत्ता में अपूर्वानंद का लेख छपा है - ‘हिंदू राष्ट्र गांव-दर-गांव। आरएसएस हिंदू सांप्रदायिकता का ...
शुक्रवार, 3 जुलाई 2015

मोदी सरकार पर संघ के विचारों की प्रेत छाया

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अरुण माहेश्वरी केंद्र सरकार में अभी क्या चल रहा है ? एक अजीबोगरीब, बंद संसार का घुटन भरा माहौल है। आडवाणीजी को आपातकाल की याद दिलाता...
शनिवार, 27 जून 2015

पूरे अमेरिका में समलैंगिक विवाह को वहां के सुप्रीम कोर्ट द्वारा कानूनी मान्यता और इस राय से जुड़े बुनियादी सवाल

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समलैंगिक विवाह के बारे में अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने इसी 25 जून को जो फैसला सुनाया है, उससे दुनिया में तहलका मचा हुआ हैं। आज के ‘...
सोमवार, 11 मई 2015

अतृप्ति का विवेक : शमशेर

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अरुण माहेश्वरी  शमशेर बहादुर सिंह का स्मरण आदमी की अंतहीन दबी हुई इच्छाओं के एक पावन खजाने के स्मरण जैसा है। ‘चुका भी हूं मैं नहीं, कह...
शुक्रवार, 8 मई 2015

रवीन्द्रनाथ की आध्यात्म-आधारित विश्व-दृष्टि

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अरुण माहेश्वरी यह रवीन्द्रनाथ के जन्म का 150वां वर्ष है। सांस्कृतिक रूप में सजग भारत के किसी भी व्यक्ति को रवीन्द्रनाथ ने आकर्षित न क...
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Arun Maheshwari
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