चतुर्दिक

विषय पर केंद्रित होने पर स्वयं विषय का स्वरूप बदल जाता है (द्वंद्वात्मक भौतिकवाद में मनन का स्थान ) ; विकल्प का निर्विकल्प में विश्रांति ही तत्व है ; इस प्रकार उत्तरोत्तर विश्रांति के द्वारा अपना स्वरूप स्फुट होता है - यह शेष है ।

शनिवार, 20 फ़रवरी 2021

भाजपा की आक्रामकता ने बंगाल की दुखती रगों को फिर एक बार छेड़ दिया है

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 बंगाल, बंगालीपन और वामपंथ (2)  —अरुण माहेश्वरी इसी 19 फरवरी को विश्वभारती विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह था, जिसमें प्रधानमंत्री ने आनलाई...
बुधवार, 17 फ़रवरी 2021

बंगालियत और वामपंथ : संदर्भ बंगाल चुनाव

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 — अरुण माहेश्वरी बंगाल का चुनाव अब भी एक टेढ़ी खीर ही बना हुआ है । हमारी नजर में इसकी सबसे बड़ी वजह है — बंगाल और वामपंथ के साथ उसके संबं...
सोमवार, 15 फ़रवरी 2021

किसान आंदोलन की गति-प्रकृति पर दैनंदिन टिप्पणियों पर एक टिप्पणी

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- अरुण   माहेश्वरी सरकार   या   कोई   भी   पत्रकार ,  जब   किसी   भी   तर्क   पर   किसान   आंदोलन   के   स्वत :  बिखरने   की   कल्पना   करता...
रविवार, 14 फ़रवरी 2021

प्रेम के जोखिम और साहसिकता के तत्त्व को पुनः अर्जित करना होगा

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 —अरुण माहेश्वरी ऐलेन बाद्यू — आज की दुनिया के एक प्रमुख दार्शनिक जिनके बारे में टेरी ईगलटन ने लिखा था कि आज की दुनिया में विरला ही कोई ऐसा ...
शनिवार, 16 जनवरी 2021

बंगाल में वाम-कांग्रेस की चुनौती

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 —अरुण माहेश्वरी  बंगाल के चुनाव का परिदृश्य अभी तक एक जटिल पहेली है । पिछले लोकसभा चुनाव के बाद से ही तृणमूल कांग्रेस और वाम के परंपरागत द्...
शुक्रवार, 15 जनवरी 2021

डा. हरिदेव शर्मा

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आज   के  ‘ टेलिग्राफ़ ’  में   रामचंद्र   गुहा   के   लेख  ‘In praise of archives and archivists : Riches and Dust’  में   डा .  हरिदेव   शर...
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Arun Maheshwari
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