चतुर्दिक

विषय पर केंद्रित होने पर स्वयं विषय का स्वरूप बदल जाता है (द्वंद्वात्मक भौतिकवाद में मनन का स्थान ) ; विकल्प का निर्विकल्प में विश्रांति ही तत्व है ; इस प्रकार उत्तरोत्तर विश्रांति के द्वारा अपना स्वरूप स्फुट होता है - यह शेष है ।

बुधवार, 26 अक्टूबर 2022

द गुड डाक्टर’ : मन को मोह लेने वाला एक अनूठा टीवी शो

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- अरुण माहेश्वरी  कल (25 अक्तूबर) के ‘टेलिग्राफ’ के टी2 में इस सूचना ने मन को सचमुच गहरी ख़ुशी दी कि ‘द गुड डाक्टर’ टेलीविजन शो के मुख्य अभि...
शुक्रवार, 14 अक्टूबर 2022

सत्ता के नैतिक विमर्श में गांधी हमेशा बने रहेंगे

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  (‘अनहद’ का गांधी विशेषांक) —अरुण माहेश्वरी   गांधी पर ‘अनहद’ का विशालकाय (650 पृष्ठों का) अंक एक सुखद आश्चर्य की तरह आया है; गांधी...
बुधवार, 28 सितंबर 2022

‘राजस्थान प्रकरण’, कांग्रेस, व्यक्ति और संगठन के प्रश्न

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  —अरुण माहेश्वरी यह कांग्रेस का जगत है । सचमुच, भारत की राजनीति के परम ऐश्वर्य का जगत । राजनेताओें के अच्छे-बुरे, सारे लक्षणों की लीला-भूमि...
रविवार, 25 सितंबर 2022

फतेहाबाद में विपक्ष की एकता भी ‘भारत जोड़ो’ का एक राजनीतिक प्रतिफलन है

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  —अरुण माहेश्वरी कल (25 सितंबर) हरियाणा के फतेहाबाद में देवीलाल जी के 109वें जन्मदिवस के ‘सम्मान दिवस समारोह’ के मंच पर विपक्ष की ताक़तों क...
रविवार, 18 सितंबर 2022

सारी दुनिया में फासीवाद के खिलाफ जनसंघर्ष का एक नायाब उदाहरण होगा - ‘भारत जोड़ो यात्रा’

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 -अरुण माहेश्वरी आज के दमघोंटू, डर और नफ़रत से भरे राजनीतिक वातावरण में कांग्रेस की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ में भारी भीड़ के जोश और उत्साह के जो...
रविवार, 4 सितंबर 2022

केरल की नेत्री शैलजा को मैगसेसे प्रसंग पर एक नज़र

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  — अरुण   माहेश्वरी     मार्क्स ,  एंगेल्स   और   लेनिन   के   विचारों   में   समाजवादी   समाज   और   समाजवादी   राज्य   के   अंगों   की   ...
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Arun Maheshwari
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