चतुर्दिक

विषय पर केंद्रित होने पर स्वयं विषय का स्वरूप बदल जाता है (द्वंद्वात्मक भौतिकवाद में मनन का स्थान ) ; विकल्प का निर्विकल्प में विश्रांति ही तत्व है ; इस प्रकार उत्तरोत्तर विश्रांति के द्वारा अपना स्वरूप स्फुट होता है - यह शेष है ।

बुधवार, 6 मार्च 2024

जनमानस तेजी से बदल रहा है

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(राहुल गांधी की यात्राओं में जन समुद्र की परिघटना का एक विश्लेषण)   − अरुण माहेश्वरी   राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा और उसमें हर जग...
गुरुवार, 15 फ़रवरी 2024

ऐसे निरुद्वेग सूत्रीकरणों का क्या लाभ ?

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  (‘टेलिग्राफ‘ में प्रभात पटनायक की टिप्पणी के बहाने व्याख्याओं के सही स्वरूप पर एक मनोविश्लेषणात्मक विवेचन)  —अरुण माहेश्वरी  चौदह फ़रवरी क...
गुरुवार, 8 फ़रवरी 2024

मोदी जी के संख्या-जाप के उन्माद का इलाज जनता ही करेगी

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  — अरुण माहेश्वरी   फ़ेसबुक पर हमने एक छोटा सा कमेंट पोस्ट किया था —  “गली-चौराहे, बात-बेबात चार सौ, चार सौ पार चीखते रहना सिर्फ़ विक्षिप्त...
रविवार, 4 फ़रवरी 2024

व्याख्या का ही अंत हो चुका है ; ज़रूरत है अव्याख्येय नूतन पाठ की

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  —अरुण माहेश्वरी  कल ( 3 फ़रवरी ) के ‘टेलिग्राफ’ में सुनंदा के दत्ता राय का एक दिलचस्प लेख पढ़ रहा था — ‘अब भारतवर्ष की रक्षा में राम खड़े ...
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Arun Maheshwari
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