चतुर्दिक

विषय पर केंद्रित होने पर स्वयं विषय का स्वरूप बदल जाता है (द्वंद्वात्मक भौतिकवाद में मनन का स्थान ) ; विकल्प का निर्विकल्प में विश्रांति ही तत्व है ; इस प्रकार उत्तरोत्तर विश्रांति के द्वारा अपना स्वरूप स्फुट होता है - यह शेष है ।

मंगलवार, 25 जून 2024

मृत्युमुखी मोदी सरकार !

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—अरुण माहेश्वरी   मोदी-3    तेज़ी के साथ एक death-drive (मृत्यु उद्दीपन) में फँसी हुई दिखाई देने लगी है । यह सच अनायास ही हमें फ्रायड और जॉक...

क्या मोदी मनोविश्लेषण का एक खास विषय बन चुके हैं !

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— अरुण माहेश्वरी   अपने पुराने मंत्रिमंडल को ही दोहरा कर, ख़ास तौर पर अमित शाह को गृहमंत्री और ओम बिड़ला को फिर से स्पीकर पद के लिए उतार कर ...
गुरुवार, 20 जून 2024

राहुल गांधी के जन्मदिन के बहाने सामाजिक-राजनीतिक विमर्श के मनोविश्लेषण के औजार पर क्षण भर

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  −अरुण माहेश्वरी कल राहुल गांधी का जन्मदिन था । वे 54 साल के पूरे हो गए । सोशल मीडिया पर राहुल के जन्मदिन की धूम थी । कांग्रेस के कार्यकर्त...
1 टिप्पणी:
शनिवार, 8 जून 2024

‘ईश्वर मर गया है’

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(चुनाव पर एक टिप्पणी)   — अरुण माहेश्वरी  ‘ईश्वर मर गया है । अब ऐसा लगता है कि उसकी प्रेत छाया मंडराती रहेगी।’ नित्शे का यह कथन तब यथार्थ मे...
रविवार, 12 मई 2024

चुनाव में मुद्दों की वापसी ही मोदी की भारी हार को सुनिश्चित कर रही है

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  —अरुण माहेश्वरी  चौथे  चरण के मतदान तक आते-आते अब 2024 के चुनाव ने साफ़ दिशा पकड़ ली है ।  मोदी और बीजेपी ने सोचा था कि वे अपने प्रचार तंत...
मंगलवार, 16 अप्रैल 2024

भाषा के मूल से दृश्य के ज़रिये ध्वनि का विस्थापन और इसके स्नायविक प्रभाव

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आज के ‘टेलिग्राफ’ में प्रसिद्ध भाषा वैज्ञानिक जी एन देवी का महत्वपूर्ण लेख है - दृष्ट की जीत ( मनुष्यता सामूहिक स्मृतिलोप की ओर बढ़ रही है )...
बुधवार, 6 मार्च 2024

जनमानस तेजी से बदल रहा है

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(राहुल गांधी की यात्राओं में जन समुद्र की परिघटना का एक विश्लेषण)   − अरुण माहेश्वरी   राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा और उसमें हर जग...
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Arun Maheshwari
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