चतुर्दिक

विषय पर केंद्रित होने पर स्वयं विषय का स्वरूप बदल जाता है (द्वंद्वात्मक भौतिकवाद में मनन का स्थान ) ; विकल्प का निर्विकल्प में विश्रांति ही तत्व है ; इस प्रकार उत्तरोत्तर विश्रांति के द्वारा अपना स्वरूप स्फुट होता है - यह शेष है ।

रविवार, 19 जनवरी 2025

इस कांग्रेस से वामपंथ के एक नए, गंभीर और अर्थपूर्ण संस्करण का उदय हो !

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 (सीपीआई(एम) की 24वीं पार्टी कांग्रेस) −अरुण माहेश्वरी सीपीआई(एम) की 24वीं पार्टी कांग्रेस (मदुराई, 2-6 अप्रैल 2025) की प्रक्रिया पुरजोर शुर...
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बुधवार, 25 दिसंबर 2024

इसराइल साहब की स्मृति में:

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  आज 26 दिसंबर । पूरे 23 साल पहले, 26 दिसंबर 2001 के दिन इसराइल साहब का देहांत हुआ था । तब मैं काम के सिलसिले में कनाडा में था । खबर मिलते ह...
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शनिवार, 7 दिसंबर 2024

“जॉक लकान या जॉक लकां !” प्रसंग

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 — अरुण माहेश्वरी  (“जॉक लकान या जॉक लकां !” इसी शीर्षक से फेसबुक की अपनी वॉल पर हमने एक पोस्ट लगाई जिस पर हुई चर्चा को हम यहां अपने ब्लाग प...
गुरुवार, 21 नवंबर 2024

रूपक कैसे बनते हैं !

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−अरुण माहेश्वरी आज के ‘टेलिग्राफ’ में रविवार के खास पन्ने ‘इनसाइट’ में एक दिलचस्प रिपोर्ताज है – A House for Bygone (व्यतीत का घर) । इसकी ले...
मंगलवार, 19 नवंबर 2024

भाषा विज्ञान और मनुष्य की भाषाई संरचना

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  -अरुण माहेश्वरी  कल (10 नवंबर 2024) अनायास ही ‘टेलिग्राफ’ में प्रकाशित एक दिलचस्प रिपोर्ताज के संदर्भ में फेसबुक पर हमारी वाल पर जॉक लकान ...
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शुक्रवार, 13 सितंबर 2024

कामरेड सीताराम येचुरी लाल सलाम !

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  (वाम-जनतांत्रिक राजनीति का एक बेहद आकर्षक व्यक्तित्व नहीं रहा) − अरुण माहेश्वरी   कामरेड सीताराम येचुरी हमारे बीच नहीं रहे । उनका इस...
गुरुवार, 8 अगस्त 2024

हंसा जाई अकेला

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(आज सुबह फेफड़ों की लंबी बीमारी के बाद कामरेड बुद्धदेव  भट्टाचार्य नहीं रहे ।मृत्यु के वक्त उनकी उम्र अस्सी साल थी। उनके परिजनों में उनके प...
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Arun Maheshwari
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