चतुर्दिक

विषय पर केंद्रित होने पर स्वयं विषय का स्वरूप बदल जाता है (द्वंद्वात्मक भौतिकवाद में मनन का स्थान ) ; विकल्प का निर्विकल्प में विश्रांति ही तत्व है ; इस प्रकार उत्तरोत्तर विश्रांति के द्वारा अपना स्वरूप स्फुट होता है - यह शेष है ।

गुरुवार, 27 नवंबर 2025

बंगाल में दुर्गा पूजा !

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  -अरुण माहेश्वरी  डा. शंभुनाथ इस उम्र में भी कोलकाता के पूजा पंडालों में घूमने का उत्साह और साहस रखते हैं, इसे उनकी फ़ेसबुक पोस्ट पर देख कर...
मंगलवार, 4 नवंबर 2025

सार्वभौमिक ठोस अपवाद (Universal Concrete Exceptions (UCE)

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-अरुण माहेश्वरी   हमने अपनी जापान यात्रा के वृत्तांत की अंतिम किस्त में अनायास ही ऐलेन बाद्यू की पुस्तक Immanence of Truths में आई एक विशेष ...

स्वातंत्र्यपूर्ण मौन के भूगोल की एक यात्रा

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(  भूटान यात्रा वृत्तांत ) -अरुण माहेश्वरी    अभी सुबह-सुबह कोलकाता हवाई अड्डे से हम एक ऐसी यात्रा पर निकल रहे हैं जो सिर्फ़ भौगोलिक नहीं, आ...
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Arun Maheshwari
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