चतुर्दिक

विषय पर केंद्रित होने पर स्वयं विषय का स्वरूप बदल जाता है (द्वंद्वात्मक भौतिकवाद में मनन का स्थान ) ; विकल्प का निर्विकल्प में विश्रांति ही तत्व है ; इस प्रकार उत्तरोत्तर विश्रांति के द्वारा अपना स्वरूप स्फुट होता है - यह शेष है ।

रविवार, 25 मई 2014

हर-हर मोदी

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अरुण माहेश्वरी आज (25 मई 2014, रविवार) के ‘जनसत्ता’ में मोदी सरकार के अभिनंदन में उदयन वाजपेयी का लेख है- ‘शायद कुछ नया हो’। ‘यह तो होना ...
शनिवार, 17 मई 2014

संभव, असंभव और भाजपा

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अरुण माहेश्वरी नरेन्द्र मोदी अभी लगातार विकास की, आशा की, सकारात्मकता और अच्छे दिनों की बात कर रहे हैं। पूरे जोशो-खरोश के साथ तोड़ने की न...

भाजपा की अभूतपूर्व जीत : एक नये युग का सूत्रपात

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अरुण माहेश्वरी सोलहवीं लोकसभा के चुनाव में नरेंद्र मोदी और भाजपा की भारी लेकिन एक प्रकार से प्रत्याशित जीत ही हुई है। चुनाव प्रचार के ...
गुरुवार, 15 मई 2014

यह चुनाव सांप्रदायिकता वनाम धर्म-निरपेक्षता का, सामाजिक न्याय का चुनाव है

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फिर एक बार यूपीए - १ के प्रयोग को थोड़े से फेर-बदल के साथ दोहराने का समय आने वाला है । इस बार के चुनाव परिणाम पर थोड़ा स्थिर होकर गंभीर...
बुधवार, 14 मई 2014

मोदी को नये सहयोगी नहीं मिलेंगे

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    टीवी चैनलों पर चलाई जारही खबरों से पता चलता है कि नरेन्द्र मोदी ने एनडीए के बाहर के सहयोगियों की तलाश के लिये अपने दूतों को चारों दिश...
रविवार, 11 मई 2014

मोदी का विदाई भाषण

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उत्तर प्रदेश, बिहार की ज़मीनी सचाई की रिपोर्ट ज्यों-ज्यों सामने आ रही है, यह साफ़ दिखाई देने लगा है कि 16 मई के बाद भारत के पूर्व प्रधानमं...
गुरुवार, 8 मई 2014

मनुष्य की अक्षय और अपराजित आत्मा के महागायक : रवीन्द्रनाथ

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सरला माहेश्वरी ‘‘बड़ा आदमी वह होता है जिसके सम्पर्क में आनेवाले का अपना देवत्व जाग उठता है। रवीन्द्रनाथ ऐसे ही महान पुरुष थे। ...
सोमवार, 5 मई 2014

दुखती रग

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सरला माहेश्वरी एनडी टीवी के रवीश कुमार लमही पंहुचे। आज (29 अप्रैल) ‘प्राइम टाइम’ पर देखा। वहां उनके साथ पूरे समय प्रेमचंद अनुरागी सुरे...

सिरहाने ग्राम्शी

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आज मेरी नयी किताब ‘सिरहाने ग्राम्शी’ मुझे मिली है। ‘राजकमल प्रकाशन’ से प्रकाशित इस किताब के ब्लर्ब पर जो लिखा गया है, उसे अपने मित्रो...

कार्ल मार्क्स का 196वां जन्मदिन

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मार्क्स के 196वें जन्मदिन पर याद आती है उनके दामाद पाल लफार्ग की निम्नलिखित तमाम बातें : ‘‘मार्क्स का विचार था कि अनुसंधान के अंतिम फ...
शनिवार, 3 मई 2014

‘एक और ब्रह्मांड’

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अपनी किताब ‘एक और ब्रह्मांड’ को मैंने कई मित्रों को उपलब्ध कराया है। और भी मित्रों को भेजूगा। ऐसा हर किताब के साथ संभव नहीं हो सकता है। ...
गुरुवार, 1 मई 2014

मई दिवस का संक्षिप्त इतिहास: हे मार्केट के शहीदों का खून बेकार नहीं जायेगा

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अरुण माहेश्वरी कार्ल मार्क्स और फ्रेडरिख एंगेल्स ने ‘कम्युनिस्ट पार्टी के घोषणा–पत्र’ का प्रारंभ इन पंक्तियों से किया था – समूचे यूरोप...
बुधवार, 30 अप्रैल 2014

इस डर को क्या नाम दें

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अरुण माहेश्वरी जनसत्ता 30 अप्रैल, 2014 : नरेंद्र मोदी कॉरपोरेट और राजनीति के मेल की उपज हैं। पूंजी की निर्मम ढंग से सेवा के सिवाय इस म...
सोमवार, 28 अप्रैल 2014

चीन : एक नयी चुनौती

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अरुण माहेश्वरी हम नहीं जानते चीनी विशिष्टता वाले समाजवाद ने दुनिया के वर्तमान समाजवादी आंदोलन को कितना बल पहुंचाया है। इसके तहत चीन क...
शुक्रवार, 18 अप्रैल 2014

गाब्रियल गार्सिया मार्केस *

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अरुण माहेश्वरी सारी दुनिया को अपने उपन्यासों से मुग्ध कर देने वाले नोबेलजयी ‘जादूई’ लेखक गाब्रियल गार्सिया मार्केस हमारे बीच नहीं रहे।...
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Arun Maheshwari
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