चतुर्दिक

विषय पर केंद्रित होने पर स्वयं विषय का स्वरूप बदल जाता है (द्वंद्वात्मक भौतिकवाद में मनन का स्थान ) ; विकल्प का निर्विकल्प में विश्रांति ही तत्व है ; इस प्रकार उत्तरोत्तर विश्रांति के द्वारा अपना स्वरूप स्फुट होता है - यह शेष है ।

शनिवार, 30 जुलाई 2016

समय जैसा है, उसे ही लिखा जाए

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प्रेमचंद के प्रति एक विनम्र श्रद्धांजलि :  समय जैसा है, उसे ही लिखा जाए (प्रेमचंद की 137वीं सालगिरह की पूर्व संध्या में एक नोट) ...
शुक्रवार, 29 जुलाई 2016

महाश्वेता देवी (1926-2016)

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महाश्वेता देवी की लिखने की टेबुल कभी भी बदली नहीं। बालीगंज स्टेशन रोड में ज्योतिर्मय बसु के मकान में लोहे की घुमावदार सीढ़ी वाली छत के ...
गुरुवार, 28 जुलाई 2016

नामवर सिंह को उनके 90वें जन्मदिन पर बधाई

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अरुण माहेश्वरी आज नामवर जी के जन्मदिन पर फेसबुक ने अपनी ओर से हमें अपनी 2014 की इसी दिन की पोस्ट की याद दिलाई है। इसमें काशीनाथ सिंह क...
रविवार, 24 जुलाई 2016

यह सिर्फ क्रांतिकारी लफ्फाजी नहीं, ‘क्रांतिकारी नौकरशाही’ का भी एक बुरा उदाहरण है

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सीपीआई(एम) से सांप्रदायिकता के खिलाफ लड़ाई में कांग्रेस सहित सभी धर्म-निरपेक्ष दलों की एकता के लिये काम करने की दलील देने वालों को प्रकाश क...
शनिवार, 16 जुलाई 2016

उत्तरप्रदेश में कांग्रेस के पहले कदम पर एक विचार

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अरुण माहेश्वरी एक अर्से बाद उत्तर प्रदेश में कांग्रेस ने सत्ता के गंभीर दावेदार के रूप में पेश करने का एक सुचिंतित कदम उठाया है।...
बुधवार, 13 जुलाई 2016

ब्रेक्सिट का झूठा सच

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अरुण माहेश्वरी आज ही ब्रेक्सिट की कवर स्टोरी का ‘फ्रंटलाइन’ का नया अंक (22 जुलाई 2016) देखा। प्रभात पटनायक, जयति घोष, सी पी चन्द्र...
मंगलवार, 12 जुलाई 2016

पाब्लो नेरुदा

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आज पाब्लो नेरुदा का 113 वां जन्मदिन है। उन्हें याद करते हुए हम यहां अपनी किताब ‘ पाब्लो नेरुदा : एक कैदी ...
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Arun Maheshwari
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