चतुर्दिक

विषय पर केंद्रित होने पर स्वयं विषय का स्वरूप बदल जाता है (द्वंद्वात्मक भौतिकवाद में मनन का स्थान ) ; विकल्प का निर्विकल्प में विश्रांति ही तत्व है ; इस प्रकार उत्तरोत्तर विश्रांति के द्वारा अपना स्वरूप स्फुट होता है - यह शेष है ।

बुधवार, 30 अप्रैल 2014

इस डर को क्या नाम दें

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अरुण माहेश्वरी जनसत्ता 30 अप्रैल, 2014 : नरेंद्र मोदी कॉरपोरेट और राजनीति के मेल की उपज हैं। पूंजी की निर्मम ढंग से सेवा के सिवाय इस म...
सोमवार, 28 अप्रैल 2014

चीन : एक नयी चुनौती

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अरुण माहेश्वरी हम नहीं जानते चीनी विशिष्टता वाले समाजवाद ने दुनिया के वर्तमान समाजवादी आंदोलन को कितना बल पहुंचाया है। इसके तहत चीन क...
शुक्रवार, 18 अप्रैल 2014

गाब्रियल गार्सिया मार्केस *

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अरुण माहेश्वरी सारी दुनिया को अपने उपन्यासों से मुग्ध कर देने वाले नोबेलजयी ‘जादूई’ लेखक गाब्रियल गार्सिया मार्केस हमारे बीच नहीं रहे।...

‘लेखक की रसोई’

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गैब्रियल गार्सिया मारक्वेज, दुनिया के महान कथाकारों-उपन्यासकारों का शायद आखिरी स्तंभ, आज ढह गया। सारी दुनिया के कहानी प्रेमी लोग उनकी मृत्य...
बुधवार, 16 अप्रैल 2014

दमघोंटू बासीपन

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इन दिनों ‘टाइम्स नाउ’ सहित दूसरे सभी चैनलों पर चलने वाली राजनीतिक बहसें चूस कर फेंके जा चुके गन्ने के भूसे से रस निकालने की किसी बुभुक्षु ...
मंगलवार, 15 अप्रैल 2014

बीमारी की जड़ है - ‘सांस्कृतिक प्रदूषण के धर्म-निरपेक्ष चूहे’ !

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अरुण माहेश्वरी मौजूदा घिनौनेपन के प्रति अक्सर दिखाई देने वाले रोष की गहरी और सच्ची भावना की आड़ के साथ की जाने वाली कुछ टिप्पणियां इतनी ...
रविवार, 13 अप्रैल 2014

डा. भीमराव अंबेडकर और समान नागरिक संहिता

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बाबा साहब डा. भीमराव अंबेडकर को याद करते हुए सरला माहेश्वरी की पुस्तक ‘समान नागरिक संहिता’ (1997) का एक छोटा सा अंश : ‘‘1985 में शाहबान...
सोमवार, 7 अप्रैल 2014

लेखकों की अपील

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दिल्ली से लेखकों और बुद्धिजीवियों के एक समूह ने देशवासियों से यह अपील की है कि देश की बहुलता को बचाए रखने और लोकतांत्रिक तथा नागरिक अधिकारो...

भाजपा का घोषणापत्र

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भारतीय जनता पार्टी के घोषणापत्र से उस रहस्य पर से पर्दा उठ गया है कि आखिर वह क्यों मतदान शुरू होजाने के दिन ...
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Arun Maheshwari
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