रविवार, 25 अक्तूबर 2020

नाटकों की संरचनात्मक कसौटी पर टीवी ड्रामा ‘मिरजापुर’


-अरुण माहेश्वरी




 कल एमेजन प्राइम पर बहुचर्चित टीवी ड्रामा ‘मिरजापुर’ के दूसरे दौर की सारी कड़ियों को देखा  यूपी की राजनीति के शिखर-स्थान और हथियारों-नशीली दवाओं के व्यापार से जुड़े माफिया गिरोहों के बीच के रिश्तों और इनके घर-परिवार की बंदबजबजाती कहानियों का नाटक मिरजापुर 

 

नाटक हमेशा चरित्र की प्रवृत्तियों की अन्तर्निहित संभावनाओं के चरम रूपों का प्रदर्शन होता है  इसीलिये इसमें अनिवार्य तौर पर हरचरित्र जैसे अपनी प्रवृत्ति के अंत की दिशा में छलांग मारते दिखाई देते हैं  मृत्यु-छलांगफ्रायड की शब्दावली में death drive काप्रदर्शन करते हुए  ऐसे में किसी भी प्रकार के चरम अपराध में लिप्त चरित्र के इसमें बचे रहने की कोई गुंजाइश नहीं होती है  उनसबका मरना तय होता है  यही वह बुनियादी कारण है जिसमें माफिया के लोगोंअपराधी राजनीतिज्ञों और सेक्स की विकृतियों सेग्रसित चरित्रों को लेकर तैयार होने वाले नाटक में हिंसा और मांसल कामुकता अपने चरमतम रूप में व्यक्त हुआ करती है  इसमेंअपराधी की मानवीयता या प्रेमी की कामुकता का कोई स्थान नहीं होता  यहीं चरित्र के उस सार को उलीच कर रख देने के नाटकों केअपने संरचनात्मक विन्यास की अनिवार्यता हैजिस सार में उसका अंत होता है  इसमें जिसे सामान्य या स्वाभाविक कहा जाता हैउसके लिये कोई खास जगह नहीं हो सकती है  नाटक में सामान्य और स्वाभाविक को हमेशा हाशिये पर ही रहना होता हैदुबक करकिसी उपेक्षित अंधेरे कोने में अप्रकाशित 

 

इन्हीं कारणों से जो लोग मिरजापुर जैसे ड्रामा में अतिशय हिंसा और कामुकता के नग्न प्रदर्शन पर नाक-भौं सिकोड़ते हुए अपने पवित्र-पावन आचरण का और मंगलकामनाओं  से लबालब भावों का प्रदर्शन करते हैंवे खुद भी वास्तव में शुद्ध मिथ्याचार का प्रदर्शन करनेवाले चरित्रों का नाटक कर रहे होते हैं  वे किसी नाटक के सचेत दर्शक कत्तई नहीं होते हैं  

 

सच यही है कि अपराधी माफिया-राजनीतिज्ञों-पुलिस-नौकरशाही की धुरी पर टिका कोई भी ड्रामा ऐसा ही हो सकता हैजैसा मिरजापुरहै  इस ड्रामा के सारे प्रमुख चरित्रों का अंत तक मर जाना और किसी स्वान संगी के साथ एक धर्मराज के बचे रहने के बजाय मिरजापुरहस्तिनापुरकी गद्दी पर ही एक प्रतिशोधी स्वान का बैठ जाना इस हिंसक नाटक का स्वाभाविक प्रहसनात्मक पटाक्षेप हो सकता थाजो इसमें हुआ है 

 

निस्संदेह हिंदी के टीवी ड्रामा के इतिहास में मिर्ज़ापुर हमें एक महत्वपूर्ण मोड़ का सूचक लगा  

 

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